भारत में होने वाले BRICS Summit 2026 को लेकर तैयारियां और काउंटडाउन जारी है, लेकिन चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के भारत दौरे को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। बीजिंग ने अब तक उनकी यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इतना ही नहीं, यह जानकारी भी सामने नहीं आई है कि अगर शी चिनफिंग भारत आते हैं तो क्या उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक होगी।
जब चीनी राष्ट्रपति के कार्यक्रम के बारे में सवाल किया गया, तो चीन के विदेश मंत्रालय ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि उसके पास उनके कार्यक्रम को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। ऐसे में BRICS Summit से पहले शी चिनफिंग की संभावित भारत यात्रा पर सस्पेंस बना हुआ है।
शी चिनफिंग के भारत दौरे पर क्यों टिकी नजर?
अगर शी चिनफिंग BRICS के सालाना शिखर सम्मेलन में शामिल होने का फैसला करते हैं, तो यह सात साल में उनकी पहली भारत यात्रा होगी। यही वजह है कि उनकी संभावित यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और चीन के संबंध लंबे समय से सतर्कता भरे रहे हैं। 1962 की जंग के बाद दोनों देशों के रिश्तों में कई तरह की चुनौतियां बनी रहीं। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई सीमा झड़प के बाद संबंधों में और तनाव आया।
गलवान की उस झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। चीनी सैनिकों की संख्या की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी।
हालांकि, इसके बाद के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिशें भी देखने को मिली हैं।
भारत-चीन रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार की कोशिश
हाल के वर्षों में भारत और चीन के संबंधों में सुधार की कोशिशें हुई हैं। खास तौर पर पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच संपर्क को लेकर ध्यान बढ़ा है।
यह बदलाव ऐसे समय में भी हो रहा है जब भारत और चीन दोनों अमेरिका के साथ अपने-अपने स्तर पर उतार-चढ़ाव भरे रिश्तों का सामना कर रहे हैं।
इसी दौरान नई दिल्ली ने 2020 की सीमा झड़पों के बाद चीनी निवेश पर लगाई गई कुछ पाबंदियों में ढील दी है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, कैपिटल गुड्स और सोलर सेल जैसे सेक्टर शामिल हैं।
सरकार कुछ उद्योगों में भारतीय और चीनी कंपनियों के बीच जॉइंट वेंचर को तेजी से मंजूरी देने पर भी विचार कर रही है।
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चीन ने कहा- दोनों देश पार्टनर हैं, कॉम्पिटिटर नहीं
भारत और चीन के आर्थिक रिश्तों को लेकर भी नई गतिविधियां सामने आई हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने रॉयटर्स को बताया कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि दोनों देश पार्टनर हैं, कॉम्पिटिटर नहीं।
चीन की ओर से यह भी कहा गया कि दोनों देश एक-दूसरे के विकास के लिए अवसर हैं, खतरा नहीं।
हालांकि, दूसरी तरफ भारत में चीनी कंपनियों के प्रस्तावित निवेश की बीजिंग की तरफ से अधिक बारीकी से जांच किए जाने की बात भी सामने आई है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और हाई-एंड टेक्नोलॉजी शामिल हो सकती है।
इससे साफ है कि आर्थिक संबंधों में सुधार की कोशिश के साथ-साथ दोनों देशों के बीच सावधानी भी बनी हुई है।
भारत-चीन व्यापार ने बनाया नया रिकॉर्ड
दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों की तस्वीर कुछ अलग नजर आती है। चीनी कस्टम्स डेटा के मुताबिक, पिछले साल भारत और चीन के बीच आपसी व्यापार 12.4 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 155 अरब डॉलर पहुंच गया।
दस साल पहले दोनों देशों के बीच व्यापार 71.6 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। यानी एक दशक में यह आंकड़ा दोगुने से भी ज्यादा हो गया है।
इस साल के पहले सात महीनों में भी दोनों देशों के बीच व्यापार में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
ये आंकड़े बताते हैं कि राजनीतिक और रणनीतिक मतभेदों के बावजूद भारत और चीन के बीच आर्थिक संबंधों का महत्व बना हुआ है।
व्यापारियों के सामने अब भी कई अड़चनें
व्यापारिक संबंधों में सुधार के बावजूद दोनों देशों के कारोबारियों के सामने कई चुनौतियां बनी हुई हैं।
जानकारों के मुताबिक नियमों के कारण निवेश का अटकना, वीजा में देरी और औद्योगिक उपकरणों पर पाबंदियां जैसी समस्याएं अभी भी मौजूद हैं।
इन चुनौतियों को कूटनीतिक प्रगति और आर्थिक रिश्तों के बीच मौजूद अंतर के तौर पर देखा जा रहा है। एक तरफ दोनों देश संबंधों को बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कारोबार से जुड़ी कई बाधाएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
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क्या BRICS Summit में मोदी-शी मुलाकात होगी?
अब सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर है कि क्या शी चिनफिंग BRICS Summit में भारत आएंगे और अगर आते हैं तो क्या उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात होगी।
जानकारों के मुताबिक ऐसी संभावित बैठक दोनों देशों के भविष्य के संबंधों की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।
शंघाई की फुदान यूनिवर्सिटी में दक्षिण एशिया मामलों के जानकार और नई दिल्ली में चीनी दूतावास के पूर्व राजनयिक लिन मिनवांग ने रॉयटर्स से कहा कि चीन संबंध बेहतर करना चाहता है, लेकिन वह यह देखना चाहता है कि भारत भी इन्हें बेहतर करने के लिए किस हद तक तैयार है।
उन्होंने किसी बड़ी प्रगति की संभावना कम बताई।
नई दिल्ली स्थित ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के वाइस प्रेसिडेंट हर्ष पंत ने भी दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उनके मुताबिक चीन के पास आर्थिक ताकत है और वह इसका इस्तेमाल एक भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर उभरने के लिए कर सकता है, खासकर ऐसे समय में जब दोनों देश अमेरिका की व्यापार नीतियों से प्रभावित हैं।
BRICS Summit 2026 से पहले आगे क्या?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल शी चिनफिंग की भारत यात्रा को लेकर है। चीन ने अभी तक उनके कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ऐसे में उनकी संभावित यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात को लेकर तस्वीर साफ होने का इंतजार है।
BRICS Summit 2026 भारत और चीन के रिश्तों के लिहाज से इसलिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि दोनों देशों के बीच एक तरफ आर्थिक संबंधों में बढ़ोतरी के आंकड़े सामने आ रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ भरोसे की कमी और कारोबार से जुड़ी चुनौतियां भी बनी हुई हैं।
शी चिनफिंग की संभावित भारत यात्रा की पुष्टि और मोदी-शी मुलाकात को लेकर आने वाला फैसला इस पूरे घटनाक्रम में अहम रहेगा। फिलहाल बीजिंग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं होने के कारण सस्पेंस बरकरार है।
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