EFTR Treatment: पटना में 80 वर्षीय महिला के शुरुआती आंत के कैंसर का इलाज बिना बड़े ऑपरेशन के आधुनिक तकनीक से किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, बिहार और झारखंड में इस तकनीक से इस तरह का इलाज पहली बार किया गया है। खास बात यह रही कि कैंसर वाले हिस्से को निकालने की पूरी प्रक्रिया करीब 15 से 20 मिनट में पूरी हुई।
मरीज को कुछ समय से मल के रास्ते खून आने, वजन कम होने और हल्के पेट दर्द की शिकायत थी। जांच के दौरान उनकी बड़ी आंत में एक छोटा पॉलिप मिला। इसके बाद कराई गई बायोप्सी में शुरुआती स्टेज के कैंसर की पुष्टि हुई।
इसके बाद पटना में गैस्ट्रो स्पेशलिस्ट और पीएमसीएच के गैस्ट्रो विभाग के एचओडी डॉ. धीरज कुमार ने EFTR यानी Endoscopic Full Thickness Resection तकनीक का इस्तेमाल कर कैंसर वाले हिस्से को पूरी तरह निकाल दिया। प्रक्रिया के बाद मरीज की हालत सामान्य रही और अगली सुबह उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
EFTR Treatment से बिना बड़े ऑपरेशन निकाला गया कैंसर वाला हिस्सा
इस मामले में डॉक्टरों ने पारंपरिक बड़े ऑपरेशन के बजाय EFTR Treatment तकनीक का इस्तेमाल किया। EFTR का पूरा नाम Endoscopic Full Thickness Resection है।
इस तकनीक में कोलोनोस्कोप के जरिए कैंसर वाले हिस्से तक पहुंचा जाता है। इसके बाद विशेष उपकरणों की मदद से चिन्हित हिस्से को पूरी मोटाई के साथ निकाला जाता है।
डॉ. धीरज कुमार के अनुसार, इस मरीज के मामले में पहले यह तय किया गया कि बड़ी आंत के किस हिस्से को हटाना है। इसके बाद विशेष क्लिप और उपकरणों की मदद से कैंसर वाले हिस्से को पूरी तरह निकाल दिया गया।
इस प्रक्रिया की खासियत यह रही कि मरीज को बड़े और अधिक जटिल ऑपरेशन से नहीं गुजरना पड़ा।
80 साल की महिला में कैसे पकड़ा गया शुरुआती कैंसर?
मरीज को मल के रास्ते खून आने की शिकायत थी। इसके साथ उनका वजन भी कम हो रहा था और हल्का पेट दर्द भी था।
इन लक्षणों को देखते हुए डॉक्टरों ने उनकी कोलोनोस्कोपी कराई। जांच के दौरान बड़ी आंत में एक छोटा पॉलिप दिखाई दिया।
आकार में यह पॉलिप बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उसकी बनावट को डॉक्टरों ने गंभीरता से लिया। इसके बाद पॉलिप की बायोप्सी कराई गई। जांच में शुरुआती अवस्था के कैंसर की पुष्टि हुई।
समय रहते कैंसर का पता चलने के बाद डॉक्टरों के सामने चुनौती कैंसर वाले हिस्से को पूरी तरह निकालने की थी, ताकि बीमारी आगे न बढ़े।
छोटा पॉलिप था, लेकिन डॉक्टरों ने नहीं किया नजरअंदाज
डॉ. धीरज कुमार के मुताबिक, बड़ी आंत में पाए जाने वाले पॉलिप कई तरह के हो सकते हैं। कुछ पॉलिप डंठल वाले होते हैं, जबकि कुछ आंत की सतह से पूरी तरह चिपके होते हैं।
इस मरीज में पाया गया पॉलिप आंत की सतह से चिपका हुआ था। मेडिकल भाषा में इसे सेसाइल पॉलिप कहा जाता है।
बायोप्सी में शुरुआती कैंसर की पुष्टि होने के बाद डॉक्टरों ने कैंसर वाले हिस्से को पूरी तरह निकालने का फैसला किया। इसी के लिए EFTR तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
15 से 20 मिनट में पूरी हुई प्रक्रिया
डॉ. धीरज कुमार ने बताया कि पूरी प्रक्रिया करीब 15 से 20 मिनट में पूरी हो गई। इस दौरान ब्लड लॉस भी लगभग नहीं के बराबर रहा।
प्रक्रिया के कुछ घंटे बाद ही मरीज की स्थिति सामान्य थी। रात में प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगली सुबह तक उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टर के अनुसार, मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। इस मामले में कम समय में प्रक्रिया पूरी होना और मरीज का जल्द अस्पताल से डिस्चार्ज होना खास बात रही।
बिहार-झारखंड में पहली बार EFTR Treatment का इस्तेमाल
डॉ. धीरज कुमार ने बताया कि इस तरह की EFTR Treatment तकनीक का इस्तेमाल बिहार और झारखंड में पहली बार इस मामले में किया गया है।
उनके मुताबिक, शुरुआती अवस्था में पकड़े गए ऐसे कैंसर के इलाज में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने भविष्य में इस तरह के मामलों में मौका मिलने पर इस तकनीक का इस्तेमाल करने की इच्छा जताई है।
साथ ही पीएमसीएच में भी इस तरह की सुविधा विकसित करने की दिशा में काम करने की बात कही गई है।
लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात मरीज के शुरुआती लक्षण रहे। महिला को मल के रास्ते खून आने के साथ वजन कम होने और पेट दर्द की शिकायत थी।
डॉ. धीरज कुमार ने लोगों को ऐसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी है। उनके अनुसार, मल में खून आना, लगातार वजन कम होना या लंबे समय तक पेट में दर्द रहना कई कारणों से हो सकता है।
इन लक्षणों के पीछे बवासीर जैसी सामान्य समस्या भी हो सकती है, लेकिन कभी-कभी ये आंत के कैंसर का संकेत भी हो सकते हैं। इसलिए ऐसे लक्षण दिखाई देने पर समय रहते डॉक्टर से संपर्क कर जांच कराना महत्वपूर्ण है।
समय पर जांच से सामने आया कैंसर
इस मामले में महिला की शिकायतों के बाद कोलोनोस्कोपी कराई गई। जांच में बड़ी आंत में छोटा पॉलिप मिला और बायोप्सी के बाद शुरुआती कैंसर की पुष्टि हुई।
इसके बाद डॉक्टरों ने कैंसर वाले हिस्से को निकालने के लिए EFTR तकनीक का इस्तेमाल किया। इससे बिना बड़े ऑपरेशन के प्रक्रिया पूरी की गई।
डॉक्टरों के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया करीब 15 से 20 मिनट में पूरी हुई और मरीज की स्थिति सामान्य रही। अगली सुबह उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई।
पटना में आधुनिक तकनीक से हुआ इलाज
पटना में 80 वर्षीय महिला के शुरुआती आंत के कैंसर के इस इलाज ने EFTR तकनीक को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। डॉक्टरों के अनुसार, बिहार और झारखंड में इस तकनीक से इस मामले में पहली बार इलाज किया गया।
इस प्रक्रिया में कोलोनोस्कोप के जरिए कैंसर वाले हिस्से तक पहुंचकर विशेष उपकरणों की मदद से उसे पूरी मोटाई के साथ निकाला गया।
फिलहाल डॉक्टरों ने इस तकनीक को शुरुआती अवस्था में पकड़े गए ऐसे मामलों में उपयोगी बताया है और पीएमसीएच में भी इस तरह की सुविधा विकसित करने की दिशा में काम करने की बात कही है।
वहीं, इस मामले से सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि शरीर में लगातार बने रहने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच होने से इस मामले में महिला के शुरुआती कैंसर का पता चला और डॉक्टरों ने आधुनिक EFTR Treatment तकनीक की मदद से कैंसर वाले हिस्से को निकालने की प्रक्रिया पूरी की।

