प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए नक्सलवाद को लेकर बड़ा बयान दिया। पीएम मोदी ने कहा कि देश में हथियार उठाने वाले नक्सलियों का प्रभाव काफी हद तक खत्म हो चुका है, लेकिन अब एक नई चुनौती सामने है—जिसे उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हथियार लेकर चलने वाले नक्सल तो चले गए, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ अभी भी मौके की तलाश में हैं। पीएम ने देशवासियों से ऐसे लोगों की पहचान करने और उनके इरादों को समझने की अपील की।
पीएम मोदी के इस बयान के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश की आंतरिक सुरक्षा, विकास और युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ बाहरी चुनौतियों से नहीं, बल्कि उन विचारों से भी सावधान रहना जरूरी है जो देश की एकता और विकास को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने नक्सलवाद के बदलते स्वरूप को लेकर देश को आगाह किया है। अब सवाल है कि पीएम के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान का राजनीतिक असर कितना व्यापक होता है और इस पर विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

