पटना में पत्रकार संगठनों ने सहरसा में पत्रकार के साथ मारपीट के मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से मुलाकात की। Patna Journalist Protest के तहत श्रमजीवी पत्रकार यूनियन संघ बिहार और युवा पत्रकार संघ के सदस्यों ने मंत्री को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में सहरसा सदर अस्पताल के डॉक्टर एसके आजाद पर पत्रकार के साथ मारपीट किए जाने के आरोप को लेकर कार्रवाई की मांग की गई। पत्रकार संगठनों ने मामले को गंभीर बताते हुए जल्द जांच और कार्रवाई की मांग रखी।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने जिला प्रशासन से अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की। साथ ही जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया।
पत्रकार संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री के सामने क्या रखा?
मुलाकात के दौरान श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महासचिव मुकुंद कुमार सिंह और युवा पत्रकार संघ के अध्यक्ष कुंदन कुमार ने मामले को लेकर अपनी बात रखी।
पत्रकार संगठनों ने आरोप लगाया कि सहरसा सदर अस्पताल में डॉक्टर एसके आजाद का प्रभाव और कथित दबदबा है। उनका कहना था कि इससे आम लोगों के साथ पत्रकारों में भी नाराजगी है।
उन्होंने पत्रकार के साथ हुई कथित मारपीट के मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की।
अस्पताल के कमरे का वीडियो भी चर्चा में
पत्रकार संगठनों ने एक वायरल वीडियो का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, जिस समय पत्रकार के साथ मारपीट की घटना की बात सामने आई, उसी दौरान अस्पताल के एक कमरे का वीडियो वायरल हुआ था।
संगठन के सदस्यों ने दावा किया कि वीडियो में सिगरेट और शराब दिखाई दे रही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या घटना के समय डॉक्टर शराब के नशे में थे।
हालांकि, शराब के नशे में होने का दावा अभी आरोप के स्तर पर है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।
डॉक्टर पर पुराने आरोपों की जांच की मांग
पत्रकार संगठनों ने डॉक्टर एसके आजाद को लेकर पहले सामने आए आरोपों की भी जांच की मांग की।
उनका कहना था कि इससे पहले सहरसा में डॉक्टर एसके आजाद पर इलाज में लापरवाही के आरोप लगे थे। इस मामले को लेकर धरना प्रदर्शन और कैंडल मार्च किए जाने की बात भी पत्रकार संगठनों ने मंत्री के सामने रखी।
संगठनों ने कहा कि उस मामले में क्या कार्रवाई हुई, इसकी भी जानकारी सामने आनी चाहिए।
इसलिए उन्होंने पुराने मामले की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित मामलों की पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए।
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निजी अस्पताल चलाने के आरोप की भी जांच की मांग
पत्रकार संगठनों ने डॉक्टर एसके आजाद पर एक निजी अस्पताल चलाने का आरोप भी लगाया।
उनका दावा है कि सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को कथित तौर पर निजी अस्पताल भेजकर आर्थिक लाभ लेने की कोशिश की जाती है। संगठन ने इस आरोप की भी जांच कराने की मांग की।
यह आरोप भी फिलहाल संगठन की ओर से लगाए गए हैं। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पत्रकार संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग से डॉक्टर की सभी गतिविधियों की जांच कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने डॉक्टर को सहरसा जिले से हटाने की मांग भी रखी।
अस्पताल मैनेजर शिल्पी कुमारी को लेकर भी जांच की मांग
मुलाकात के दौरान अस्पताल मैनेजर शिल्पी कुमारी का मुद्दा भी उठाया गया।
पत्रकार संगठनों ने कहा कि शिल्पी कुमारी पर वर्ष 2019 में शैक्षणिक योग्यता को लेकर आरोप लगाए गए थे। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि वह सहरसा सदर अस्पताल में मैनेजर के पद पर कैसे कार्यरत हैं।
संगठन ने उनकी नियुक्ति और शैक्षणिक योग्यता से जुड़े पुराने आरोपों की भी जांच की मांग की।
इस मामले में भी अंतिम स्थिति जांच और संबंधित विभाग की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
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स्वास्थ्य मंत्री ने जिला प्रशासन से मांगी रिपोर्ट
पत्रकार संगठनों की पूरी बात सुनने के बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया।
उन्होंने उच्च पदाधिकारियों से मामले में अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी। मंत्री ने पत्रकार संगठनों को जल्द कार्रवाई किए जाने का आश्वासन भी दिया।
अब इस मामले में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर नजर रहेगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
मुलाकात में कई पत्रकार मौजूद रहे
स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात के दौरान बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के उपाध्यक्ष आफताब आलम सिद्दीकी, पटना जिला महासचिव प्रेम कुमार और संजय कुमार उर्फ गोलू मौजूद रहे।
युवा पत्रकार संघ के अध्यक्ष कुंदन कुमार भी इस दौरान मौजूद थे। इनके अलावा शुभेंदु रमन, पंकज कुमार, कृपा शंकर, शिव कुमार, अविनाश कुमार सिंह, सचिन तिवारी, अक्षय किशोर और ओम प्रकाश सहित कई पत्रकार मौजूद रहे।
कई मीडिया हाउस के सदस्य भी मुलाकात में शामिल हुए।
अब कार्रवाई पर टिकी नजर
सहरसा में पत्रकार के साथ मारपीट के आरोप को लेकर पत्रकार संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री के सामने अपनी मांग रख दी है।
मंत्री की ओर से जिला प्रशासन से अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगे जाने की बात सामने आई है। साथ ही जल्द कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया है।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। Patna Journalist Protest के बीच अब पत्रकार संगठनों की नजर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
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