बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। Bihar Flood को लेकर तेजस्वी यादव ने गुजरात और बिहार में आपदा के दौरान केंद्र सरकार की सक्रियता की तुलना करते हुए कई सवाल उठाए।
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार में बाढ़ से 50 से अधिक लोगों की मौत हुई है, हजारों मवेशी गायब हैं और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि करीब 45 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं और हजारों करोड़ रुपये के नुकसान की बात सामने आ रही है।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी स्थिति के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से बिहार के लिए पर्याप्त सहायता की घोषणा नहीं की गई है।
Bihar Flood पर तेजस्वी ने केंद्र से पूछे सवाल
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में गुजरात का उदाहरण देते हुए केंद्र सरकार की आपदा के दौरान भूमिका पर सवाल उठाया।
उन्होंने दावा किया कि गुजरात में बारिश के कारण स्थिति बिगड़ने पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सक्रिय हो जाते हैं। तेजस्वी के मुताबिक, 23 जुलाई को गुजरात में बारिश के दौरान एक व्यक्ति की मौत हुई थी और इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के मुख्यमंत्री के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की थी।
उन्होंने कहा कि इस दौरान एयरफोर्स और एनडीआरएफ को अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया था।
गुजरात और बिहार की स्थिति की तुलना
तेजस्वी यादव ने कुछ साल पहले गुजरात में आई बाढ़ का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हवाई सर्वेक्षण किया था और 500 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की गई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि राहत और बचाव के लिए सेना, एयरफोर्स और एनडीआरएफ की टीमें लगाई गई थीं। उनके अनुसार, प्रभावित लोगों को दो-दो लाख रुपये की सहायता भी दी गई थी।
तेजस्वी यादव ने इसी उदाहरण को बिहार की मौजूदा बाढ़ की स्थिति से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से सवाल किया।
बिहार के लिए सहायता को लेकर सवाल
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार में बाढ़ से 50 से अधिक लोगों की मौत हुई है। उन्होंने हजारों मवेशियों के गायब होने और हजारों करोड़ रुपये के नुकसान की बात भी कही।
उन्होंने कहा कि करीब 45 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इसके बावजूद उनके अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से बिहार के लिए अपेक्षित सहायता या पैकेज की घोषणा नहीं की गई है।
तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री से फोन पर बात की है।
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‘बिहार के साथ इतना भेदभाव क्यों?’
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में बिहार और गुजरात के बीच कथित भेदभाव का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि गुजरात में बारिश की स्थिति में भी केंद्र सरकार सक्रिय हो जाती है, जबकि बिहार में बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने के बावजूद केंद्र की ओर से वैसी सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि बिहार के साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
तेजस्वी यादव ने इसे केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बताते हुए लोगों से इस सवाल पर विचार करने की अपील की।
ठनका गिरने से होने वाली मौतों का भी उठाया मुद्दा
तेजस्वी यादव ने बिहार में ठनका गिरने से होने वाली मौतों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार में एक सीजन में ठनका गिरने से ही सैकड़ों लोगों की मौत हो जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद ठनका गिरने को राष्ट्रीय आपदा की सूची में शामिल नहीं किया गया है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि इसके कारण केंद्र सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं मिलता। उन्होंने गुजरात में बारिश के कारण होने वाली मौतों के लिए केंद्र से मिलने वाली दो लाख रुपये की सहायता का भी जिक्र किया।
आपदा सहायता को लेकर केंद्र पर सवाल
तेजस्वी यादव का कहना है कि आपदा की स्थिति में केंद्र और राज्य के बीच सहायता की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने गुजरात में बारिश के दौरान केंद्र की सक्रियता का उदाहरण देते हुए बिहार में बाढ़ के दौरान सहायता को लेकर सवाल उठाया। उनका आरोप है कि बिहार को उसके अधिकार के अनुसार सहायता नहीं मिल रही है।
‘पहले बिहार के हक के लिए एक रहते थे नेता’
तेजस्वी यादव ने बिहार की पुरानी राजनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले बिहार में आपदा आने पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद बिहार के हक के मुद्दे पर एकजुटता दिखाई देती थी।
उन्होंने लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार का नाम लेते हुए कहा कि राजनीतिक रूप से अलग होने के बावजूद आपदा के समय बिहार के अधिकार के लिए दोनों एक रहते थे।
तेजस्वी यादव ने मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार के 30 सांसद और आठ केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद बिहार के हक की आवाज नहीं उठाई जा रही है।
‘हम विपक्ष में हैं, फिर भी केंद्र से पैकेज मांग रहे हैं’
तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्ष में होने के बावजूद वह बाढ़ के पहले दिन से केंद्र सरकार से सहायता की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है। तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर केंद्र सरकार से बिहार के लिए पैकेज मिलता है तो उसका लाभ राज्य सरकार और बिहार के लोगों को मिलेगा।
उन्होंने सवाल किया कि इसमें उनका व्यक्तिगत क्या लाभ है।
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केंद्र पर दबाव बनाने को बताया बिहार के हित में
तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर उनका दृष्टिकोण नकारात्मक होता तो वह केंद्र सरकार पर बिहार के लिए पैकेज देने का दबाव क्यों बनाते।
उन्होंने कहा कि वह बिहार और बिहारियों के लिए काम करने की बात करते हैं और यही सीख उन्हें पार्टी नेतृत्व से मिली है।
चुनावी राजनीति को लेकर भी तेजस्वी का हमला
तेजस्वी यादव ने भाजपा पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लोग अब खुले तौर पर कहते हैं कि चार साल 11 महीने बिहारियों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाए और चुनाव के आखिरी महीने में पांच किलो चावल और 10 हजार रुपये देकर लोग सब भूल जाएंगे।
यह बयान देते हुए उन्होंने बिहार की मौजूदा बाढ़ की स्थिति को चुनावी राजनीति से भी जोड़कर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि करीब 45 लाख लोगों के प्रभावित होने के बावजूद बिहार को सहायता, सहयोग और उम्मीद नहीं मिल रही है।
तेजस्वी ने कहा- बिहार को अपने हक के लिए आवाज उठानी होगी
अपने बयान के अंत में तेजस्वी यादव ने बिहार के लोगों से इस पूरे मामले पर सोचने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिहार ने हमेशा अपने हक के लिए केंद्र सरकार के सामने अपनी बात मजबूती से रखी है।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि मौजूदा समय में भाजपा के प्रभाव के कारण बिहार अपने हक के लिए आवाज उठाने के बजाय केंद्र के सामने झुक रहा है।
उन्होंने कहा कि उनका सवाल राजनीति से अलग है और पूछा कि आखिर बिहार के साथ ऐसा क्यों हो रहा है।
बिहार की बाढ़ को लेकर तेजस्वी यादव का यह बयान केंद्र और राज्य सरकार की भूमिका, आपदा राहत, मुआवजा और बिहार के लिए विशेष सहायता जैसे मुद्दों पर केंद्रित है। उन्होंने गुजरात में केंद्र की कथित सक्रियता और बिहार की स्थिति की तुलना करते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
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