बिहार में इस समय मौसम और बाढ़ की स्थिति एक विरोधाभासी तस्वीर पेश कर रही है। राज्य के कई जिलों में लोग बाढ़ से परेशान हैं, जबकि इस साल बिहार में कुल बारिश सामान्य से काफी कम रही है। Bihar Rainfall के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 8 सितंबर तक राज्य में कुल 601.1 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 27 फीसदी कम है।
इसके बावजूद गंगा समेत कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि और बराजों से छोड़े जा रहे पानी के कारण राज्य के 14 जिलों में बाढ़ का असर बना हुआ है। आपदा प्रबंधन विभाग की 9 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 40.21 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है।
जून से अगस्त तक सामान्य से कम बारिश
बिहार में इस मानसून सीजन के दौरान जून, जुलाई और अगस्त में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।
जून में राज्य में 103.8 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 36 फीसदी कम रही। जुलाई में 227.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 33 फीसदी कम थी।
अगस्त में भी बारिश सामान्य से नीचे रही। इस महीने 190.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 29 फीसदी कम है।
हालांकि सितंबर में अब तक स्थिति कुछ अलग रही है। सितंबर में 79.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 31 फीसदी अधिक है।
इस तरह 1 जून से 8 सितंबर तक बिहार में कुल 601.1 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 27 फीसदी कम है।
कम बारिश के बावजूद क्यों बनी है बाढ़ की स्थिति?
राज्य में बारिश सामान्य से कम रहने के बावजूद बाढ़ की स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हुई है। गंगा समेत कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि और बराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी का असर कई जिलों में दिखाई दे रहा है।
इसका असर खास तौर पर नदी किनारे और निचले इलाकों में देखने को मिल रहा है। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत उपलब्ध कराने का काम जारी है।
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14 जिलों के 84 प्रखंडों में बाढ़ का असर
आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया और अरवल में बाढ़ का प्रभाव है।
इन 14 जिलों के 84 प्रखंडों की 514 ग्राम पंचायतों में करीब 40.21 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
प्रभावित आबादी तक राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन की ओर से सामुदायिक रसोई और राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं।
723 सामुदायिक रसोई में लाखों लोगों को भोजन
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राज्य में 723 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इनके माध्यम से अब तक करीब 19.65 लाख लोगों को भोजन कराया गया है।
इसके अलावा 15 राहत शिविरों में 13,446 बाढ़ पीड़ितों के लिए आवासन, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।
राहत सामग्री के तौर पर अब तक करीब 1.94 लाख पॉलीथीन शीट और 29,400 ड्राई राशन पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।
नावों से जारी है लोगों का आवागमन
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के निष्क्रमण और आवागमन के लिए 1,979 नावें चलाई जा रही हैं। जलभराव और बाढ़ के कारण कई इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित होने की स्थिति में नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पशुपालकों के लिए भी राहत व्यवस्था की गई है। अब तक 5,178 क्विंटल पशुचारा वितरित किया जा चुका है।
Bihar Rainfall: गंडक, कोसी और सोन के जलस्राव की स्थिति
9 सितंबर की सुबह 10 बजे वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक नदी का जलस्राव 86,000 क्यूसेक दर्ज किया गया। इसकी प्रवृत्ति फिलहाल स्थिर बताई गई है।
वीरपुर बराज पर कोसी नदी का जलस्राव 1,48,200 क्यूसेक रहा और इसकी प्रवृत्ति भी स्थिर है।
वहीं इन्द्रपुरी बराज पर सोन नदी का जलस्राव 80,785 क्यूसेक दर्ज किया गया। यहां जलस्राव बढ़ने की प्रवृत्ति बताई गई है।
SDRF और NDRF की टीमें तैनात
संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने राहत और बचाव दलों की तैनाती की है। राज्य के अलग-अलग जिलों में SDRF की 27 और NDRF की 10 टीमें तैनात हैं।
इन टीमों को जरूरत के अनुसार राहत और बचाव कार्यों में लगाया जा रहा है। प्रशासन की नजर बाढ़ प्रभावित इलाकों के साथ-साथ नदियों और बराजों के जलस्राव पर भी बनी हुई है।
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Bihar Rainfall: अगले दो दिनों में बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों में बिहार के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है।
ऐसे में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की चुनौती बनी हुई है। एक तरफ राज्य में मानसून की कुल बारिश सामान्य से कम है, वहीं दूसरी तरफ नदियों के जलस्तर और बराजों से छोड़े जा रहे पानी के कारण कई इलाकों में बाढ़ का असर बरकरार है।
Bihar Rainfall के आंकड़े बताते हैं कि कम कुल बारिश का मतलब यह नहीं है कि राज्य के सभी हिस्सों में बाढ़ का खतरा खत्म हो गया है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं और प्रशासन की नजर जलस्तर तथा मौसम की स्थिति पर बनी हुई है।
कम बारिश और बाढ़ ने खड़ी की दोहरी चुनौती
बिहार में इस साल मानसून की कुल बारिश सामान्य से कम रहने के बावजूद बाढ़ का असर व्यापक है। 14 जिलों में करीब 40.21 लाख लोगों के प्रभावित होने के कारण राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
अब आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के जलस्तर की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। खासकर गंगा, गंडक, कोसी और सोन जैसी नदियों के जलस्राव में बदलाव का सीधा असर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
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