Jharkhand High Court में JPSC और JSSC से जुड़ी नियुक्तियों के मामले में शुक्रवार को अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार के नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर पहले से लगी अंतरिम रोक को बरकरार रखा।
मामला JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा है। इसके अलावा JSSC CGL, CDPO और Food Safety Officer यानी FSO नियुक्तियां भी इसमें शामिल हैं।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें रखीं। इसके बाद कोर्ट ने अंतरिम राहत जारी रखने का आदेश दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को होगी।
किन भर्ती परीक्षाओं का मामला है?
इस मामले में झारखंड की कई प्रमुख भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं।
इनमें JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा शामिल है। साथ ही JSSC CGL, CDPO और Food Safety Officer भर्ती भी मामले का हिस्सा हैं।
राज्य सरकार ने इन नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया था। इसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया।
कोर्ट में इन फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई जारी है।
18 अगस्त के सरकारी फैसले के बाद शुरू हुआ विवाद
राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 को कई प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर फैसला लिया था। सरकार ने कथित अनियमितताओं और जांच से जुड़े तथ्यों के आधार पर कई परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी।
इस फैसले के बाद नियुक्त अभ्यर्थियों की ओर से हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं।
इसके बाद 20 अगस्त को हाईकोर्ट ने JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा और FSO नियुक्तियों को रद्द करने वाले आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। बाद में JSSC CGL और CDPO नियुक्तियों को लेकर भी अदालत ने रोक जारी की।
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सरकार ने कोर्ट में दाखिल किया काउंटर एफिडेविट
शुक्रवार की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में अपना काउंटर एफिडेविट दाखिल किया गया।
इसके बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। कोर्ट ने यह समय दिया।
मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तारीख तय की गई है।
CID जांच की निगरानी करेंगे रिटायर्ड जस्टिस गौतम चौधरी
इस मामले में CID की जांच भी चल रही है। अब हाईकोर्ट ने जांच की निगरानी के लिए रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की जिम्मेदारी तय की है।
उनकी भूमिका जांच की निगरानी और नियुक्त अभ्यर्थियों से जुड़ी परेशानियों पर नजर रखने की होगी।
साथ ही, मामले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
जांच के दौरान अभ्यर्थियों को परेशान करने पर कोर्ट की व्यवस्था
सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से जांच को लेकर एक चिंता भी सामने रखी गई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि CID जांच के नाम पर कुछ अभ्यर्थियों को बार-बार बुलाया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने भी व्यवस्था स्पष्ट की।
अदालत के अनुसार, यदि जांच के दौरान किसी नियुक्त अभ्यर्थी को अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है, तो वह अपनी शिकायत रिटायर्ड जस्टिस गौतम चौधरी के सामने रख सकता है।
हाईकोर्ट ने नियुक्तियों पर क्यों लगाई थी रोक?
इस मामले में नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। पहले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने नियुक्तियों को रद्द करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया था।
अदालत ने कहा था कि नियमित नियुक्ति को प्रभावित करने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी है। यानी संबंधित कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
इसी वजह से राज्य सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई गई थी।
हजारों नियुक्त अभ्यर्थियों की नौकरी पर टिकी नजर
इस मामले का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ता है, जिन्हें इन भर्ती परीक्षाओं के जरिए नियुक्ति मिली है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, JPSC 11वीं से 13वीं परीक्षा के जरिए 342 नियुक्तियां हुई थीं। वहीं JSSC CGL के जरिए करीब 1,932 अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई थी। CDPO और FSO नियुक्तियां भी इस विवाद में शामिल हैं।
इसलिए हाईकोर्ट की अंतरिम रोक इन अभ्यर्थियों के लिए फिलहाल महत्वपूर्ण है।
CID जांच भी इस पूरे मामले का अहम हिस्सा बनी हुई है।
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7 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को होगी।
उस समय याचिकाकर्ताओं की ओर से सरकार के काउंटर एफिडेविट पर जवाब रखा जा सकता है। साथ ही जांच की प्रगति और नियुक्तियों से जुड़े दूसरे कानूनी पहलुओं पर भी सुनवाई होगी।
फिलहाल पहले से मिली अंतरिम राहत जारी है। इसका मतलब है कि राज्य सरकार के नियुक्तियां रद्द करने वाले आदेश पर लगी रोक अभी बनी हुई है।
अभ्यर्थियों की नजर अब अगली सुनवाई पर
JPSC और JSSC से जुड़ा यह विवाद पिछले कई सप्ताह से चर्चा में है। एक तरफ भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच का मुद्दा है।
दूसरी ओर, नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों की नौकरी का सवाल है।
हाईकोर्ट ने दोनों पहलुओं को सुनने की प्रक्रिया जारी रखी है। CID जांच की निगरानी के लिए रिटायर्ड जस्टिस गौतम चौधरी की भूमिका भी तय की गई है।
अब 7 अक्टूबर की सुनवाई पर सभी पक्षों की नजर रहेगी।
Jharkhand High Court के आदेश से फिलहाल क्या बदला?
फिलहाल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के नियुक्तियां रद्द करने वाले फैसले पर लगी रोक को बरकरार रखा है।
JPSC 11वीं से 13वीं सिविल सेवा, JSSC CGL, CDPO और FSO से जुड़ी नियुक्तियों पर यह अंतरिम व्यवस्था लागू है।
साथ ही, CID जांच की निगरानी की जिम्मेदारी रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को दी गई है। जांच के दौरान किसी अभ्यर्थी को अनावश्यक परेशानी होने पर शिकायत का रास्ता भी बताया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी। उस सुनवाई में आगे की कानूनी स्थिति पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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